पुणे न्यूज डेस्क: पुणे के बहुचर्चित मुंढवा जमीन सौदे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के युवा नेता पार्थ पवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। विकास खरगे की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि इस विवादित भूमि हस्तांतरण में पार्थ पवार की कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं थी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या विलेख पर उनके हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं, जिससे उन पर लगे आपराधिक आरोपों का आधार समाप्त हो गया है।
यह मामला पुणे के मुंढवा क्षेत्र में स्थित 40 एकड़ 'महार वतन' भूमि से जुड़ा है। आरोप लगाया गया था कि लगभग ₹1,800 करोड़ के बाजार मूल्य वाली इस बेशकीमती जमीन को पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी 'अमेडिया एंटरप्राइजेज' ने मात्र ₹300 करोड़ में अधिग्रहित कर लिया था। इसके साथ ही विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस सौदे के दौरान लगभग ₹21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
हालाँकि समिति ने पार्थ पवार को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है, लेकिन जांच में प्रशासनिक स्तर पर गंभीर खामियां पाई गई हैं। रिपोर्ट में उन दो सरकारी अधिकारियों (तत्कालीन तहसीलदार और सब-रजिस्ट्रार) के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इस हस्तांतरण को मंजूरी दी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रक्रियात्मक उल्लंघन हुआ था, लेकिन इसमें सीधे तौर पर पार्थ पवार का हाथ नहीं था।
इस क्लीन चिट का महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। पिछले काफी समय से विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और पवार परिवार पर हमलावर थे। अब इस रिपोर्ट के आने के बाद पार्थ पवार के लिए राजनीतिक रास्ते और भी सुगम हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस कानूनी बाधा के दूर होने के बाद अब उन्हें आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।